crista jha

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crista jha·Aug 12
हमारी पृथ्वी भीषण दबाव में है, इसका भविष्य बड़ा ही दयनीय है, जिसका कारण प्रत्यक्ष रूप से मानव समुदाय है। यदि 2050 तक विश्‍व की जनसंख्‍या 9.6 अरब तक पहुंचती है तो हमें हर व्‍यक्ति की मौजूदा जीवन शैली को सहारा देने के लिए 3 पृथ्वियों की आवश्‍यकता होगी। हालात ऐसे हैं कि हर वर्ष कुल आहार उत्‍पादन का लगभग एक-तिहाई अर्थात 10 खरब अमरीकी डॉलर मूल्‍य का 1.3 अरब टन आहार उपभोक्‍ताओं और दुकानदारों के कचरों के डिब्‍बों में सड़ता है अथवा परिवहन और फसल कटाई के खराब तरीकों के कारण बर्बाद हो जाता है। एक अरब से अधिक लोगों को ताजा पानी सुलभ नहीं हो पाता है। दुनिया में 3% से भी कम पानी ताजा तथा पीने लायक है और उसमें से 2.5% अंटार्कटिक, आर्कटिक और ग्लेशियर्स में जमा हुआ है। इस प्रकार सभी पारिस्थितिकी तथा ताजे पानी की जरूरतों के लिए हमें सिर्फ 0.5% का ही सहारा है। इसके साथ ही कारखानों के उड़ते धुएँ, लगातार कटते पेड़, नदियों और महासागरों का दूषित होता जल, रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोग किया जाने वाला प्लास्टिक, रोज का बर्बाद होता अनाज और ऐसे ही कई विषय प्रकृति को सता रहे हैं जो बेहद गंभीर हैं। संवहनीय उपभोग और उत्‍पादन का आशय संसाधनों और ऊर्जा के कुशल प्रयोग को प्रोत्‍साहन देना, टिकाऊ बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना, सबके लिए बुनियादी सेवाएं, प्रदूषण रहित और उत्‍कृष्‍ट नौकरियां तथा अधिक गुणवत्‍तापूर्ण जीवन की सुलभता प्रदान करना है। इसके फलस्वरूप विकास योजनाओं को साकार करने में सहायता मिलती है, भविष्‍य की आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक लागत कम होती है, आर्थिक स्‍पर्धा क्षमता मजबूत होती है और गरीबी में कमी आती है। सतत् विकास तभी हासिल किया जा सकता है, जब हम न सिर्फ अपनी अर्थव्‍यवस्‍थाओं में वृद्धि करें, बल्कि उस प्रक्रिया में बर्बादी को भी कम से कम करें। राष्‍ट्रीय जैव ईंधन नीति और राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ ऊर्जा निधि सरकार की कुछ प्रमुख योजनाएं हैं, जिनका उद्देश्‍य संवहनीय खपत और उत्‍पादन हासिल करना तथा प्राकृतिक संसाधनों के कुशल उपयोग का प्रबंधन करना है। #2030 के भारत के संवहनीय उपभोग और उत्‍पादन का उद्देश्‍य कम साधनों से अधिक और बेहतर लाभ उठाना, संसाधनों का उपयोग, विनाश और प्रदूषण कम करके आर्थिक गतिविधियों से जन कल्‍याण के लिए कुल लाभ बढ़ाना और जीवन की गुणवत्‍ता में सुधार करना है। इसके साथ ही उपभोक्ता स्तरों पर भोजन की प्रति व्यक्ति बर्बादी को आधा करना और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान सहित उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं में खाद्य पदार्थों की क्षति को कम करना, स्वीकृत अंतर्राष्ट्रीय समझौतों के अनुसार रसायनों और उनके कचरे का उनके पूरे जीवन चक्र में पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित प्रबंधन हासिल करना, वायु, जल और मिट्टी में उन्हें छोड़े जाने में उल्लेखनीय कमी करना ताकि मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर उनका विपरीत प्रभाव कम से कम हो। इसके साथ ही 2030 तक रिसाइक्लिंग और दोबारा इस्तेमाल के जरिए कचरे की उत्पत्ति में उल्लेखनीय कमी करना भी इस लक्ष्य के अंतर्गत सुनिश्चित किया गया है।
crista jha·Aug 12
आज के दौर में हर इंसान गाँव की गलियों को छोड़ शहरों की सड़कों पर भटकना चाहता है, गाँव की सुकून भरी जिंदगी को छोड़ शहरों में दिनभर की थकान पाना चाहता है, कोयल की कूक और चिड़ियों की चहचहाहट को छोड़ भागती गाड़ियों का शोर सुनना चाहता है, मिट्टी की भीनी खुशबु को छोड़ कारखानों और गाड़ियों के धुएँ को अपनाना चाहता है, पेड़ों से मिलने वाली ताजा हवा को छोड़ प्रदुषण भरी साँसें लेना चाहता है। आधा मानव समुदाय यानी 3.5 अरब लोग आज शहरों में रहते हैं और अनुमान है कि 2030 तक 10 में से 6 व्‍यक्ति शहरों के निवासी होंगे। शहरों में बस्ती जिंदगियों का एक कारण यह भी है कि शहर, संवहनीय विकास की बुनियाद हैं। वहीं पर विचार, वाणिज्य, विज्ञान और उत्पादकता पनपते हैं। शहरों में लोगों को आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से सम्पन्नता के अवसर मिलते हैं किंतु यह ऐसे संपन्न शहरों में ही संभव है, जहाँ लोगों को उत्कृष्ट रोजगार मिल सके तथा जहाँ भूमि संसाधनों पर बढ़वार का बोझ न हो। दुनिया के शहरों ने पृथ्‍वी की सिर्फ 3% जमीन घेर रखी है लेकिन ऊर्जा की कुल खपत का 60-80% और पृथ्‍वी का 75% कार्बन उत्‍सर्जन शहरों में होता है। आने वाले दशकों में करीब 85% शहरी विस्‍तार विकासशील देशों में होगा। हमारी तेजी से फैलती शहरी दुनिया में भीड़ बढ़ रही है, बुनियादी सेवाओं का अभाव है, उपयुक्‍त आवास की कमी है और बुनियादी ढांचा कमजोर हो रहा है, जिसके कारण ताजे पानी की आपूर्ति, सीवेज, रहन-सहन के माहौल और जन स्‍वास्‍थ्‍य पर दबाव पड़ रहा है। दुनिया में 30% शहरी जनसंख्या तंग बस्तियों में रहती है और सहारा के दक्षिण अफ्रीकी देशों में आधे से अधिक शहरी निवासी तंग बस्तियों में रहते हैं। यदि हम भारत की बात करें तो यहाँ भी शहरीकरण तेजी से हो रहा है। 2001 और 2011 के बीच देश की शहरी जनसंख्‍या में 9.1 करोड़ की वृद्धि हुई। अनुमान है कि 2030 तक भारत में एक-एक करोड़ से अधिक की जनसंख्‍या वाले 6 मेगा शहर होंगे। सतत विकास के संवहनीय शहर तथा समुदाय लक्ष्य के अंतर्गत भारत सरकार के स्‍मार्ट सिटी मिशन, जवाहरलाल नेहरू राष्‍ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन और अटल पुनर्जीवन एवं शहरी कायाकल्‍प मिशन शहरी क्षेत्रों में सुधार की चुनौती का सामना करने के लिए कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्‍य 2022 तक सबके लिए आवास का लक्ष्‍य हासिल करना है। इसके साथ ही इस लक्ष्य के अन्य उद्देश्य सबके लिए उपयुक्त, सुरक्षित और सस्ते आवास तथा बुनियादी सेवाओं की सुलभता सुनिश्चित करना, तंग बस्तियों की स्थिति सुधारना, सुरक्षित, सस्ती, सुलभ और संवहनीय परिवहन प्रणालियों तक पहुँच जुटाना, सार्वजनिक परिवहन के विस्तार से सड़क सुरक्षा सुधारना, महिलाओं, बच्चों, विकलांगों और वृद्धजनों तथा लाचारी की स्थिति में जीते लोगों की जरूरतों पर विशेष ध्यान देना, देश की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण एवं सुरक्षा के प्रयास मजबूत करना, आदि शामिल हैं।
crista jha·Aug 12
नागरिकों को समानता का अधिकार प्राप्त होने के बावजूद भी वर्तमान में हालात ऐसे हैं कि प्रत्येक क्षेत्र में असमानता ही देखने को मिलती है। कम होने के बजाए यह दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है जो एक दयनीय मुद्दा है। यदि हम गतवर्षों की बात करें तो 2014 में दुनिया में सबसे अमीर एक प्रतिशत जनसंख्‍या के पास दुनिया की 48% दौलत थी, जबकि सबसे निचले स्‍तर पर मौजूद 80% लोगों के पास कुल मिलाकर दुनिया की सिर्फ 6% दौलत थी। यह असंतुलन तब और भी स्‍पष्‍ट हो जाता है, जब हम देखते हैं कि सिर्फ 80 व्‍यक्तियों के पास इतनी दौलत है जितनी दुनिया भर में सबसे कम आय वाले 3.5 अरब लोगों के पास है। औसत आय में असमानता 1990 और 2010 के बीच विकासशील देशों में सिर्फ 11% ही बढ़ी। भारत के लिए आय में असमानता का गिनि कोएफिशिएंट 2010 में 36.8% था, जो घटकर 2015 में 33.6% रह गया। सबसे कम विकसित देश, भूमि से घिरे विकासशील देश और छोटे द्वीपीय विकासशील देश गरीबी कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। किन्‍तु इन देशों में स्‍वास्‍थ्‍य एवं शिक्षा सेवाओं तथा अन्‍य परिसंपत्तियों की सुलभता में भारी विषमताएं हैं। देशों के बीच आय में असमानता भले ही कम हुई हो, लेकिन देशों के भीतर असमानता लगातार बढ़ रही है। आंकड़ों के अनुसार 2000 के दशक के अंतिम वर्षों में दक्षिण एशिया में सबसे दौलतमंद जनसंख्‍या के बच्‍चों के लिए प्राइमरी स्‍कूल की पढ़ाई पूरी करने की संभावना सबसे गरीब वर्गों के बच्‍चों की तुलना में दोगुनी अधिक थी। लैटिन अमरीका और पूर्व एशिया में सबसे गरीब परिसंपत्तियों वाले वर्गों में पांच वर्ष की आयु से पहले ही बच्चों की मृत्‍यु की आशंका सबसे अमीर वर्गों के बच्चों की तुलना में तीन गुना अधिक है। #2030 के सतत विकास के इस लक्ष्य के अंतर्गत यह संकल्प लिया गया है कि असमानता कम करने के लिए नीतियां सिद्धांत रूप में सार्वभौमिक होनी चाहिए जिनमें लाभों से वंचित और हाशिए पर जीती जनसंख्‍या की जरूरतों पर ध्‍यान दिया जाए। समावेशन को सामाजिक के साथ-साथ राजनीतिक क्षेत्रों में भी सभी आयु, लिंग, धर्म और जातीय समाजों में सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जाना चाहिए जिससे देशों के भीतर समानता की परिस्थितियां पैदा हो सकें। जनधन-आधार-मोबाइल कार्यक्रम पर भारत सरकार जितना बल दे रही है, उसका उद्देश्‍य समावेशन, वित्‍तीय सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा की एक समग्र रणनीति है। ये सभी प्राथमिकताएं 2030 तक सबके लिए समानता हासिल करने और सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक समावेशन को प्रोत्‍साहित करने के उद्देश्‍यों के अनुरूप हैं। इस लक्ष्य के चलते यह भी सुनिश्चित किया गया है कि भारत वर्ष के प्रत्येक व्यक्ति को अन्य व्यक्ति के समान ही अधिकार प्राप्त हो। इसके साथ ही विकलांगता, जातीयता, मूल धर्म, आर्थिक अथवा किसी अन्य भेदभाव के बिना प्रत्येक व्यक्ति के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना तथा परिणाम की असमानताएँ कम करना भी शामिल है।Share this:
crista jha·Aug 12
औद्योगिक विकास भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिशा निर्धारक रहा है। भाप इंजन से लेकर आज तक की वास्तव में ग्लोबल प्रोडक्शन चेन्स एंड प्रोसेसेस (वैश्विक उत्पादन श्रृंखलाओं और प्रक्रियाओं) तक उद्योगों ने हमारी अर्थव्यवस्थाओं को बदला है और हमारे समाज में बड़े बदलाव लाने में सहायता की है। किन्तु टिकाऊ तौर-तरीकों, आधुनिक प्रौद्योगिकी और बुनियादी सुविधाओं की उपस्थिति के अभाव में हम मनचाही वृद्धि नहीं कर पा रहे हैं, जो एक विचारणीय मुद्दा है। विकासशील देशों में कुल मिलाकर करीब 2.6 अरब लोग दिन भर के लिए बिजली पाने में कठिनाई महसूस करते हैं। इसके अलावा दुनिया भर में 2.5 अरब लोग बुनियादी स्‍वच्‍छता से वंचित हैं, जबकि लगभग 80,00,000,00 लोगों को जल सुलभ नहीं है। जिनमें से लाखों लोग सहारा के दक्षिणी अफ्रीकी देशों और दक्षिण एशिया में अनेक निम्‍न आय वाले देशों के लिए बुनियादी सुविधाओं की मौजूदा सीमाएं उत्‍पादकता पर करीब 40% तक असर डालती हैं। ऐसा अनुमान  है कि उद्योग और संचार की एक मजबूत वास्तविक श्रंखला उत्पादकता और आय बढ़ा सकती है और स्वास्थ्य, खुशहाली तथा शिक्षा में सुधार ला सकता है। इसी तरह से टेक्नोलॉजी की प्रगति देशों के रूप में हमारी खुशहाली बढ़ाती है और पहले से अधिक संसाधनों एवं ऊर्जा कुशलता के माध्यम से पृथ्वी की स्थिति में भी सुधार कर सकती है।सतत् विकास के उद्योग, नवाचार तथा बुनियादी सुविधाएँ लक्ष्य के माध्यम से देश की सरकार ने संकल्प लिया है कि अधिक जानदार बुनियादी सुविधाओं में निवेश, सीमा के आर-पार सहयोग तथा छोटे उद्यमों को प्रोत्साहन, सतत् औद्योगिक विकास सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे। साथ ही यब भी सुनिश्चित किया है कि हमें अपना औद्योगिक ढांचा सुधारना होगा और उसमें नई टेक्नोलॉजी की प्रमुख भूमिका होगी। सरकारों और कंपनियों को नवाचार, वैज्ञानिक अनुसंधान प्रोत्साहन (साइंटिफिक रिसर्च प्रमोशन) तथा सबके लिए इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की सुलभता सुधारने हेतु एक अनुकूल नीतिगत माहौल पैदा करने में योगदान देना होगा। #2030 के भारत के सतत विकास का एक लक्ष्य उद्योग, नवाचार तथा बुनियादी सुविधाएँ प्राप्त करना है। इस लक्ष्य का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय और सीमाओं के आर-पार बुनियादी सुविधाओं सहित गुणवत्तापूर्ण, विश्वसनीय, टिकाऊ और जानदार बुनियादी सुविधाओं का विकास करना है जिससे आर्थिक विकास हो और मानव कल्याण को सहारा मिले। इसके साथ ही एम्प्लॉयमेंट एंड ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (रोजगार और सकल घरेलू उत्पाद) में राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार उद्योग की हिस्सेदारी में बहुत अधिक वृद्धि की जाए। इसके साथ ही, सरकार के मेक इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसे प्रमुख प्रयासों तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रमेव जयते कार्यक्रम के बल पर नवाचार और सतत् औद्योगिक एवं आर्थिक विकास को गति मिल रही है।
crista jha·Aug 12
#2030 के भारत के सतत विकास के महत्वपूर्ण लक्ष्यों में से एक है उत्कृष्ट कार्य तथा आर्थिक वृद्धि। उत्कृष्ट कार्य का सीधे तौर पर आशय अच्छे गुण से युक्त कार्य से है। इस लक्ष्य का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हमारी सीरीज के पॉइंट 4 से नाता है, क्योंकि उत्कृष्ट कार्य करने के लिए कहीं न कहीं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आवश्यकता होती ही है। यदि हम इस विषय के इतिहास की बात करें, तो दुनियाभर में वार्षिक आर्थिक वृद्धि सन् 2000 में 3% थी, जो घटकर 2014 में 1.3% रह गई। वैश्विक बेरोजगारी 2007 में 17 करोड़ से बढ़ते-बढ़ते 2012 में करीब 20.2 करोड़ हो गई, जिसमें से करीब 7.5 करोड़ युवतियां और युवक थे। इस धीमी और असामान्‍य प्रगति को देखते हुए प्रशासन ने यह निश्चय किया कि गरीबी मिटाने की हमारी आर्थिक और सामाजिक नीतियों पर नए सिरे से सोचकर नए साधनों का सहारा लेना होगा। सतत् विकास एजेंडा का मूल मंत्र है ‘कोई पीछे छूटने न पाए’। साथ ही ‘सभी को मिले काम, ऐसा हो अर्थव्यवस्था में सुधार’ मोटो को अपनाकर इस लक्ष्य के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध है। 10 और 24 वर्ष की आयु के बीच 36 करोड़ से अधिक युवाओं के साथ भारत में दुनिया की सबसे युवा आबादी निवास करती है। इस डेमोग्राफिक प्रॉफिट के उपयोग पर ही देश के लिए संपन्‍न और जानदार भविष्‍य की रचना का सारा दारोमदार है। किन्‍तु उच्‍चतर शिक्षा में भारत का सिर्फ 23% का सकल भर्ती अनुपात दुनिया में सबसे कम अनुपातों में से एक है। भारत में श्रम शक्ति हर वर्ष 80,00,000 से अधिक बढ़ जाने का अनुमान है और देश को अब से लेकर 2050 तक 28,00,00000 रोजगार जुटाने की जरूरत होगी, जिसके परिणाम स्वरुप उपरोक्‍त मौजूदा स्‍तरों में एक-तिहाई वृद्धि होगी। उत्कृष्ट कार्य तथा आर्थिक वृद्धि लक्ष्य का उद्देश्‍य 2030 तक हर जगह सभी पुरुषों और महिलाओं के लिए पूर्ण एवं उत्‍पादक रोजगार हासिल करना, युवाओं के लिये रोजगार के अवसरों में वृद्धि करना, क्षेत्रों, आयु समूहों और लिंग के आधार पर असमानता को कम करना, अनौपचारिक रोजगारों में कमी करना, सभी श्रमिकों के लिये सकुशल और सुरक्षित कार्य वातावरण को बढ़ावा देना है। इसके अंतर्गत यह भी सुनिश्चित किया गया है कि #2030 के भारत में अक्षम या अपंग व्यक्तियों सहित सभी लोगों को समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए और साथ ही बाल श्रम को भी खत्म किया जाए। राष्‍ट्रीय कौशल विकास मिशन, दीन दयाल उपाध्‍याय अंत्‍योदय योजना, राष्‍ट्रीय सेवा योजना और महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना जैसे सरकार के कुछ प्रमुख कार्यक्रमों का उद्देश्‍य सभी के लिए उत्‍कृष्‍ट कार्य जुटाना है।
crista jha·Aug 12
ram madhav भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव (Ram Mdhav) ने आंध्र प्रदेश के पार्टी नेताओं से ये बात कही.अमरावती: भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव (Ram Mdhav) ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश के पार्टी नेताओं से कहा कि वे केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम के सहारे न बैठे रहें, बल्कि 2024 में राज्य में सत्ता पाने के लिए पूरे दमखम के साथ काम करें.यदि आप ऐसा करते हैं तो आप उसी एक प्रतिशत (2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिले वोट) पर रहेंगे.’’ राम माधव ने कहा, ‘‘मोदी अगले 10-15 साल तक प्रधानमंत्री रहेंगे.
indian railway इंडियन रेलवे (Ministry of Railways) ने नियमित ट्रेनों के संचालन को लेकर एक बड़ा ऐलान है.नई दिल्लीः इंडियन रेलवे (Ministry of Railways) ने नियमित ट्रेनों के संचालन को लेकर एक बड़ा ऐलान है.रेलवे मिनिस्ट्री ने कोरोना वायरस के बढ़ते कहर को ध्यान में रखते हुए नियमित पैसेंजर ट्रेनों (passenger train) के संचालन को अगली सूचना तक रद्द करने का फैसला लिया है.भारतीय रेलवे ने मंगलवार (11 अगस्त) को अपने आधिकारिक ट्विटर पेज पर एक बयान जारी कर ऐलान किया है.रेलवे ने बताया, ”सभी नियमित पैसेंजर मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों के साथ सभी उपनगरीय ट्रेनों का संचालन अगली सूचना तक रद्द रहेगा.” हालांकि मौजूदा वक्त में जो 230 स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं वो पहले की तरह चलती रहेंगी.रेलवे ने कहा, लॉकडाउन से पहले तक चल रहीं अन्य सभी नियमित ट्रेनें (Regular trains) और उपनगरीय ट्रेनें (Suburban trains) अगले नोटिस तक निलंबित रहेंगी.
भूमिपूजन के अगले ही दिन कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या भारत में 20 लाख पार कर गई और दुनिया में रोज जितने लोगों को संक्रमण हो रहा है, उसकी एक चौथाई से ज्यादा तादाद हिंदुस्तानियों की है.
crista jha·Aug 11
पेट्रोलियम धरातल के नीचे स्थित अवसादी परतों के बीच पाया जाने वाला संतृप्त हाइड्रोकार्बनों का काले भूरे रंग का तैलीय द्रव है,जिसका प्रयोग वर्तमान में ईंधन के रूप में किया जाता है| पेट्रोलियम को ‘जीवाश्म ईंधन’ या ‘चट्टानी तेल’ भी कहते हैं| वर्तमान विश्व में पेट्रोलियम को ऊर्जा के स्रोत के रूप में महत्व के कारण, ‘काला सोना’ भी कहा जाता है| पेट्रोलियम धरातल के नीचे स्थित अवसादी परतों के बीच पाया जाने वाला संतृप्त हाइड्रोकार्बनों का काले भूरे रंग का तैलीय द्रव है, जिसका प्रयोग वर्तमान में ईंधन के रूप में किया जाता है| पेट्रोलियम को ‘जीवाश्म ईंधन’ भी कहते हैं, क्योंकि इनका निर्माण धरातल के नीचे उच्च ताप व दाब की परिस्थितियों में मृत जीव-जंतुओं व वनस्पतियों के जीवाश्मों के रासायनिक रूपान्तरण से होती है| ‘पेट्रोलियम’ शब्द का निर्माण ‘पेट्रो’ अर्थात ‘चट्टान’ और ‘ओलियम’ अर्थात ‘तेल’ से मिलकर हुआ है, इसीलिए इसे ‘चट्टानी तेल’ या ‘रॉक ऑयल’ भी कहा जाता है| वर्तमान विश्व में इसे, इसके ऊर्जा के स्रोत के रूप में महत्व के कारण, ‘काला सोना’ भी कहा जाता है| पेट्रोलियम का निष्कर्षण व शोधन पेट्रोलियम की प्राप्ति धरातल के नीचे स्थित अवसादी चट्टानों के ऊपर कुएं खोदकर की जाती है,जिसे ‘ड्रिलिंग’ भी कहते है| विश्व में सबसे पहले पेट्रोलियम कुएं की खुदाई संयुक्त राज्य अमेरिका के पेंसिवेनिया राज्य में स्थित ‘टाइटसविले’ स्थान पर की गयी थी| ‘ड्रिलिंग’ से प्राप्त होने वाले पेट्रोलियम के रूप को कच्चा तेल’ (Crude Oil) कहा जाता है| कच्चे तेल को रिफायनरियों में प्रसंस्कृत किया जाता है|  पेट्रोलियम से ही पेट्रोल,मिट्टी के तेल,विभिन्न हाइड्रोकार्बनों, ईंथर, प्रकृतिक गैस आदि को प्राप्त किया जाता है| पेट्रोलियम से इसके अवयवों के अलग करने की विधि ‘प्रभावी आसवन विधि’ (Fractional Distillation Method) कहा जाता है| इसे ‘पेट्रोलियम/तेल का शोधन’ (Petroleum Refining) कहा जाता है| डीजल: यह एक तरह का तैलीय द्रव हाइड्रोकार्बन है, जो पेट्रोलियम के प्रभाजी आसवन से प्राप्त होता है और इसका प्रयोग वाहनों,उद्योगों,रेलवे, आदि में ऊर्जा के स्रोत के रूप में किया जाता है| यह पर्यावरण की दृष्टि से हानिकारक है, क्योंकि इसके जलने से अनेक ऐसी गैसें निकलती हैं जोकि विषैली होती हैं,जैसे-सल्फर डाई ऑक्साइड|यह पेट्रोल की तुलना में सस्ता होता है| ‘सिटी डीजल’ डीजल का एक ऐसा रूप है,जिसके जलने से हानिकारक गैसों का कम उत्पादन होता है|इसमें सल्फर की मात्रा कम होती है,इसीलिए इसे ‘अल्ट्रा लो सल्फर डीजल’ भी कहते हैं| यूरोप के अधिकांश शहरों में इसके प्रयोग होने के कारण इसे ‘सिटी डीजल’ कहते हैं| द्रवित पेट्रोलियम गैस (एल.पी.जी.):यह प्रोपेन,ब्यूटेनऔर आइसो ब्यूटेन जैसे हाइड्रोकार्बनों काद्रवितमिश्रण है,जिसका प्रयोग रसोई गैस के रूप में किया जाता है| इसे भी पेट्रोलियम के प्रभाजी आसवन से प्राप्त किया जाता है| इस गैस के रिसाव की पहचान के लिए इसमें दुर्गंधयुक्त ‘मरकेप्टन’ नाम की गैस मिलाई जाती है| गैसोहोल: यह पेट्रोलव एल्कोहल का मिश्रण है,और गन्ने के रस से मिलने वाले एल्कोहल को पेट्रोल में मिलाकर प्राप्त किया जाता है| इसकी खोज ब्राज़ील में की गयी थी| पेट्रोलियम के उपयोग पेट्रोलियम का उपयोग निम्न रूपों में किया जाता है: परिवहन मेंऔद्योगिक ऊर्जा के रूप मेंप्रकाश व ऊष्मा जनन हेतुस्नेहक (Lubricants) के रूप मेंपेट्रोकेमिकल उद्योगों मेंपेट्रोलियम के उप-उत्पादों (By- Products) का विविध रूप में उपयोग  पेट्रोलियम ऊर्जा का प्रमुख स्रोत और उद्योगों में व्यापक रूप से प्रयोग किया जाने वाला रासायनिक उत्पाद है| लेकिन वर्तमान में इसकी बढ़ती मांग की आपूर्ति प्राकृतिक स्रोतों से पूरी नहीं हो पा रही है,अतः अब आवश्यकता है कि इसके विकल्पों की तलाश की जाए| संयुक्त राज्य अमेरिका,चीन,भारत आदि पेट्रोलियम के सबसे बड़े उपभोक्ता है,जिसकी आपूर्ति सऊदी अरब,इराक, ईरान जैसे तेल सम्पन्न देशों द्वारा की जाती है| अतः वर्तमान में किसी भी देश की अर्थव्यवस्था पर पेट्रोलियम के उपभोग और उत्पादन का व्यापक प्रभाव पड़ता है| भारत में पेट्रोलियम की माँग और घरेलू उत्पादन के बीच बहुत बड़ा अंतर है,इसी कारण से भारत के आयात उत्पादों में पेट्रोलियम का स्थान सबसे ऊपर रहता है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तेल के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव यहाँ की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं|
crista jha·Aug 11
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की साउथ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट ने ऐसे 3 लोगों गिरफ्तार किया है जो कि पहले प्राइवेट नौकरी किया करते थे लेकिन कोरोना के चलते नौकरी जाने में बाद इन लोगों ने गाड़ियों पर हाथ साफ करना शुरू कर दिया.दरअसल, दिल्ली पुलिस की साउथ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट को एक गुप्त सूचना मिली थी कि ऑटो लिफ्टर का एक गैंग इलाके में आने वाला है जिसके बाद पुलिस ने 9 तारीख की रात बदमाशों को पकड़ने के लिए श्रीनिवासपुरी इलाके में ट्रैप लगाया.सुबह करीब 4.30 बजे के आसपास पुलिस को एक बाइक आती दिखाई दी जिसपर 3 लोग सवार थे.चोरी की गई बाइक्स को ये लोग यूपी में 4 से 5 हजार में बेच दिया करते थे.बहरहाल, पुलिस ने इन लोगों के पास से 6 चोरी की बाइक भी बरामद की है.
Hi there, You are invited to a Zoom webinar.When: Aug 14, 2020, 05:00 PM India Topic: T.V Artist as a career in IndiaRegister in advance for this webinar: https://bit.ly/30EujTBAfter registering, you will receive a confirmation email containing information about joining the webinar.----------Webinar SpeakerSushmita Mukherjee (Indian television actress )NOTEAll the participants will receive an e-certificate just after the webinar.Career Khoj by Troopel
crista jha·Aug 11
प्रतीकात्मक तस्वीर नई दिल्ली: कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले 5 महीनों से बंद स्कूलों के खुलने पर अभी कोई फैसला नहीं हो पाया है.अफसरों ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक़ कक्षा 3 तक के स्टूडेंट्स को ऑनलाइन क्लास की अनुमति नहीं है.वहीं कक्षा 4 से 7 तक सीमित ऑनलाइन क्लास ली जा सकती हैं.
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